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भारतीय शेयर बाजार में DIIs का दबदबा, 2025 में 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश

भारतीय शेयर बाजार में घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 2025 में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की भारी बिकवाली के बावजूद, DIIs ने इस साल जनवरी से जून तक भारतीय इक्विटी में 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। यह निवेश 2024 के बाद दूसरा सबसे बड़ा वार्षिक निवेश है और पहली छमाही के लिए रिकॉर्ड निवेश को दर्शाता है। इस मजबूत निवेश ने बाजार को स्थिरता प्रदान की है और भारतीय अर्थव्यवस्था में घरेलू निवेशकों के बढ़ते विश्वास को उजागर किया है।

 

DIIs की ऐतिहासिक भूमिका

2025 की पहली छमाही में DIIs, जिसमें म्यूचुअल फंड, बैंक, और बीमा कंपनियां शामिल हैं, ने भारतीय शेयर बाजार में अभूतपूर्व सक्रियता दिखाई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के अनुसार, DIIs ने इस दौरान 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया, जबकि FIIs ने 1.20 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की। यह पहली बार है कि DIIs की हिस्सेदारी FIIs से अधिक हो गई है, जिसमें DIIs के पास 16.91 प्रतिशत और FIIs के पास 16.84 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यह बदलाव भारतीय बाजार में घरेलू निवेशकों की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।

 

FIIs की बिकवाली और बाजार की स्थिरता

वैश्विक अनिश्चितताओं, जैसे अमेरिका-चीन व्यापार तनाव और ट्रम्प प्रशासन की टैरिफ नीतियों के कारण, FIIs ने भारतीय बाजार से पूंजी निकाली। अप्रैल 2025 में बाजार पूंजीकरण में 11.30 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि, DIIs की मजबूत खरीदारी ने इस बिकवाली के प्रभाव को कम किया। उदाहरण के लिए, 9 जून 2025 को FIIs ने 3,565 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जबकि DIIs ने 25,513 करोड़ रुपये की खरीदारी की, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी बनी रही।

 

बाजार का प्रदर्शन और प्रमुख क्षेत्र

DIIs के निवेश ने निफ्टी 50 को 25,100 के स्तर से ऊपर बनाए रखने में मदद की, जो 2025 का उच्चतम समापन स्तर है। सेंसेक्स भी 82,391.72 पर बंद हुआ, हालांकि 10 जून को इसमें मामूली गिरावट देखी गई। बैंकिंग, आईटी, और रक्षा क्षेत्रों में निवेशकों का रुझान बढ़ा। रक्षा क्षेत्र की कंपनियां, जैसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) और भारत डायनेमिक्स (BDL), 2 प्रतिशत तक बढ़ीं, क्योंकि भारतीय सेना ने 30,000 करोड़ रुपये की मिसाइल प्रणाली खरीद की योजना बनाई। वहीं, कोचीन शिपयार्ड और HDFC बैंक जैसी कंपनियों में उच्च ट्रेडिंग वॉल्यूम देखा गया।

 

DIIs की रणनीति और भविष्य की संभावनाएं

DIIs ने इंडेक्स फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट्स में रिकॉर्ड लॉन्ग पोजिशन बनाई है, जो बाजार में तेजी की उम्मीद को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी 25,200 के स्तर को पार कर सकता है, बशर्ते वैश्विक संकेत सकारात्मक रहें। घरेलू निवेशकों का यह रुझान म्यूचुअल फंडों और बीमा योजनाओं में बढ़ते खुदरा निवेश से प्रेरित है। इक्विटी म्यूचुअल फंडों में मई 2025 में 19,000 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, हालांकि यह पिछले महीने से 22 प्रतिशत कम था।

 

निष्कर्ष

DIIs का 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश भारतीय शेयर बाजार की मजबूती और घरेलू निवेशकों के विश्वास का प्रतीक है। FIIs की बिकवाली के बावजूद, DIIs ने बाजार को संभाला और निफ्टी को 25,000 के स्तर पर बनाए रखा। यह उपलब्धि न केवल आर्थिक स्थिरता को दर्शाती है, बल्कि भारतीय निवेशकों की परिपक्वता को भी उजागर करती है। भविष्य में, वैश्विक व्यापार वार्ताओं और मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर नजर रहेगी, जो बाजार की दिशा तय करेंगे।

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