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Goods & Services Tax (GST) के आठ वर्षों में दोगुना: संग्रह में वृद्धि और चुनौतियाँ

Goods & Services Tax (GST) के आठ वर्षों में दोगुना: संग्रह में वृद्धि और चुनौतियाँ

परिचय

भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू हुए 8 वर्ष पूरे हो चुके हैं। 1 जुलाई 2017 को भारत में लागू किया गया वस्तु और सेवा कर (GST) देश की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में एक क्रांतिकारी कदम था। यह कर प्रणाली 17 स्थानीय करों और 13 उपकरों को एक पांच-स्तरीय ढांचे में समाहित करके कर व्यवस्था को सरल बनाने का प्रयास थी। जीएसटी ने ‘एक राष्ट्र, एक कर’ की अवधारणा को साकार किया, जिसने देश को एक एकीकृत बाजार में बदल दिया। आठ वर्षों के बाद, जीएसटी ने कर संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, करदाता आधार में विस्तार और डिजिटल कर प्रणाली को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस रिपोर्ट में, हम जीएसटी के आठ वर्षों की उपलब्धियों, हाल के आंकड़ों, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं का विश्लेषण करेंगे, यह रिपोर्ट जीएसटी के 8 वर्षों के सफर, वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करती है।

 

पृष्ठभूमि और समयावधि: 8 वर्षों का सफर

  1. आरंभिक चुनौतियाँ (2017-2019): जीएसटी (Goods & Services Tax) को 1 जुलाई 2017 को भारत में लागू किया गया था। शुरुआत में तकनीकी गड़बड़ियाँ, कंप्लायंस में दिक्कतें और कर दरों की जटिलता के कारण संग्रहण अनुमान से कम रहा।

FY18 (2017-18): कुल संग्रहण रु. 7.41 लाख करोड़।

FY19 (2018-19): रु. 11.77 लाख करोड़ (पहला पूर्ण वित्तीय वर्ष)।

  1. जीएसटी संग्रह: पांच वर्षों में दोगुना

वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में जीएसटी संग्रह ने 22.08 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड उच्च स्तर हासिल किया, जो वित्त वर्ष 2020-21 (FY21) में 11.37 लाख करोड़ रुपये से लगभग दोगुना है। यह 9.4% की वार्षिक वृद्धि को दर्शाता है, जो मजबूत आर्थिक गतिविधियों और बेहतर कर अनुपालन का संकेत है। औसत मासिक संग्रह FY25 में 1.84 लाख करोड़ रुपये रहा, जो FY24 में 1.68 लाख करोड़ रुपये और FY22 में 1.51 लाख करोड़ रुपये है। अप्रैल 2025 में मासिक जीएसटी संग्रह ने 2.37 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बनाया, जो अब तक का उच्चतम स्तर है, जबकि मई में यह 2.01 लाख करोड़ रुपये रहा। हालांकि, जून 2025 में संग्रह 1.85 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.2% की वृद्धि दर्शाता है, लेकिन यह पिछले चार वर्षों में सबसे धीमी वृद्धि थी।

 

मूल बातें

  1. सुधार और वृद्धि (2020-2023)

सरकार ने कंप्लायंस को सरल बनाया, फर्जी बिलिंग पर कार्रवाई की और ई-इनवॉइसिंग जैसी तकनीकें लागू कीं।

FY20: रु. 12.22 लाख करोड़ (COVID-19 से पहले)।

FY21: रु. 12.22 लाख करोड़ (महामारी का प्रभाव)।

FY22: रु. 14.83 लाख करोड़ (आर्थिक सुधार)।

FY23: रु. 18.10 लाख करोड़ (ऐतिहासिक वृद्धि)।

  1. रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन (FY24-FY25)

FY24: रु. 20.14 लाख करोड़ (पहली बार 20 लाख करोड़ पार)।

FY25: रु. 22.08 लाख करोड़ (अब तक का सर्वोच्च)।

  • कुल ₹22.08 लाख करोड़ — यह राशि FY21 में ₹11.37 लाख करोड़ थी, यानी सिर्फ पाँच साल में लगभग 2 गुना वृद्धि ।
  • FY24 की तुलना में यह 9.4% सालाना वृद्धि है (FY24 में ₹20.18 लाख करोड़) ।

 

  1. मासिक संग्रह का विश्लेषण

अप्रैल 2025: 2.37 लाख करोड़ रुपये (12.6% की वार्षिक वृद्धि)

मई 2025: 2.01 लाख करोड़ रुपये

जून 2025: 1.85 लाख करोड़ रुपये (6.2% की वृद्धि, चार वर्षों में सबसे कम)

जून का संग्रह अप्रैल और मई की तुलना में कम रहा, जो मौसमी कारकों, आर्थिक गतिविधियों में कमी, या नीतिगत बदलावों का परिणाम हो सकता है। फिर भी, FY25 में औसत मासिक संग्रह 1.84 लाख करोड़ रुपये रहा, जो जीएसटी की मजबूत स्थिति को दर्शाता है।

जून 2025 का  ₹1.85 लाख करोड़ संग्रह, जो पिछले साल जून की तुलना में 6.2% अधिक है, लेकिन अप्रैल–मई के रिकॉर्ड स्तर से कम है — अप्रैल ₹2.37 लाख करोड़, मई ₹2.01 लाख करोड़ ।

 

करदाता आधार का व्यापक विस्तार

जीएसटी लागू होने के समय 2017 में पंजीकृत करदाताओं की संख्या 65 लाख थी, जो 2025 तक बढ़कर 1.51 करोड़ से अधिक हो गई। इसमें 1.32 करोड़ सामान्य करदाता, 14.86 लाख कम्पोजीशन करदाता, और 3.71 लाख स्रोत पर कर कटौती (TDS) खाते शामिल हैं। यह वृद्धि अर्थव्यवस्था के बढ़ते औपचारिकरण और डिजिटल कर प्रणाली में विश्वास को दर्शाती है। मई 2025 तक 162 करोड़ से अधिक जीएसटी रिटर्न दाखिल किए गए, जो इस प्रणाली की व्यापक स्वीकार्यता और पैमाने को दर्शाता है। इसका मतलब यह है कि मध्यम और छोटे व्यवसाय सहित नए करदाताओं का समावेश बढ़ा है। जिससे कर आधार और उसकी प्रभावशीलता दोनों में वृद्धि हुई है।

 

जीएसटी की उपलब्धियाँ

  1. आर्थिक औपचारिकरण

जीएसटी ने भारत की अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डिजिटल कर प्रणाली और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) नियंत्रणों ने कर चोरी को कम किया और अनुपालन को बढ़ाया। डेलॉइट की एक हालिया रिपोर्ट, GST@8, ने FY25 को जीएसटी के लिए “ब्लॉकबस्टर वर्ष” के रूप में वर्णित किया, जो महामारी के बाद की आर्थिक रिकवरी में इसकी भूमिका को रेखांकित करता है।

 

  1. कर प्रणाली का सरलीकरण

जीएसटी ने 17 स्थानीय करों और 13 उपकरों को एकीकृत करके कर ढांचे को सरल बनाया। इससे व्यवसायों के लिए अनुपालन लागत कम हुई और राज्यों के बीच माल की आवाजाही आसान हुई। ‘एक राष्ट्र, एक कर’ ने एक एकीकृत राष्ट्रीय बाजार बनाया, जिसने व्यापार को बढ़ावा दिया।

 

  1. प्रौद्योगिकी एकीकरण

जीएसटी पोर्टल के उन्नयन और डिजिटल प्रक्रियाओं ने करदाताओं के लिए अनुपालन को आसान बनाया। स्वचालित रिफंड प्रणाली, विशेष रूप से निर्यातकों के लिए, ने नकदी प्रवाह को बेहतर बनाया। मई 2025 तक रिफंड में तेजी आई, जो व्यवसायों के लिए सकारात्मक रहा।

 

  1. नीतिगत सुधार

नरेंद्र मोदी सरकार ने जीएसटी दरों में कटौती की, जैसे कि निर्माणाधीन मकानों पर जीएसटी को 12% से 5% और किफायती आवास खंड में 8% से 1% तक कम करना। इन सुधारों ने उपभोक्ताओं और व्यवसायों दोनों को लाभ पहुंचाया।

 

क्षेत्रीय प्रदर्शन: पंजाब का उदाहरण

पंजाब ने जून 2025 में जीएसटी संग्रह में 44.44% की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की, और FY26 की पहली तिमाही में 27.01% की वृद्धि हासिल की। पहली तिमाही में शुद्ध जीएसटी संग्रह 6,830.40 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 5,377.75 करोड़ रुपये से काफी अधिक है। यह वृद्धि मई में भारत-पाकिस्तान तनाव के बावजूद हासिल की गई, जो पंजाब की आर्थिक लचीलापन को दर्शाती है।

 

जीएसटी का भविष्य: संभावनाएँ और चुनौतियाँ

संभावनाएँ:

  1. डिजिटलीकरण: ब्लॉकचेन और AI के उपयोग से कर चोरी में कमी।
  2. कर दरों का सरलीकरण: वर्तमान 4-स्लैब (5%, 12%, 18%, 28%) को कम करने की योजना।
  3. अर्थव्यवस्था का विस्तार: जीडीपी वृद्धि के साथ जीएसटी संग्रहण में भी बढ़ोतरी।
  4. टैक्स ट्रायबल व्यवस्था: एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 के अंत तक जीएसटी ट्रिब्यूनल शुरू हो सकते हैं, जिससे विवाद तेजी से निपटेंगे ।

 

चुनौतियाँ:

  1. अनौपचारिक अर्थव्यवस्था: छोटे व्यवसाय अभी भी जीएसटी से बाहर।
  2. राज्यों और केंद्र के बीच तनाव: क्षतिपूर्ति शुल्क का मुद्दा।
  3. वैश्विक अनिश्चितता: तेल की कीमतें और मंदी का जोखिम।
  4. प्रणालीगत और प्रक्रियात्मक कमियाँ: हालांकि जीएसटी ने अनुपालन को सरल बनाया है, फिर भी प्रणालीगत और प्रक्रियात्मक कमियाँ मौजूद हैं। रिफंड प्रक्रियाओं में और सुधार की आवश्यकता है, और छोटे व्यवसायों को अनुपालन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
  5. क्षेत्रीय असमानताएँ : हालांकि पंजाब जैसे कुछ राज्यों ने उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की, अन्य क्षेत्रों में वृद्धि असमान रही। क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों में अंतर जीएसटी संग्रह को प्रभावित करता है, जिसके लिए नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
  6. 8 वर्षों में प्रक्रियाओं में सुधार हुआ, लेकिन अभी भी रेट स्लैब, आईटी ढांचे, इनपुट कर की जटिलता को लेकर समस्याएँ बनी हैं ।

 

डिजिटलरण का लाभ,व्यापक अनुपालन और आर्थिक नीतिगत प्रभाव

जीएसटी पोर्टल और डिजिटल रिटर्न ने मध्यम एवं छोटे व्यवसायी को सुविधा प्रदान की है, व्यवसायों में डिजिटल रिटर्न और पोर्टल आधारित प्रणाली अपनाने में वृद्धि हुई, जिसके परिणामस्वरूप कर अनुपालन सख्त और प्रभावी हुआ, इसे और मजबूत करने की गुंजाइश है।

 आर्थिक स्थिरता और फिस्कल मजबूती

GST संग्रह में निरंतर वृद्धि ने केंद्र और राज्यों की राजकोषीय स्थिति को मजबूत किया है, जिससे बुनियादी ढांचे और विकास योजनाओं के लिए राजस्व सुनिश्चित हुआ है।

प्रणाली की कार्यक्षमता

GST ने 17 केंद्रीय और राज्य करों तथा 13 उपकरों को एक साथ जोड़कर पांच-स्तरीय कर संरचना बनाई, जिससे प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बनी।

तकनीकी और नीतिगत सुधार की आवश्यकता

वर्तमान में, slab rationalisation (कर दरों का सरलीकरण), कंप्लायंस बोझ कम करने और IT प्रणाली सुधार पर जोर दिया जा रहा है।

GST 2.0 और dispute resolution

संभावित जीएसटी ट्रिब्यूनल की संभावनाएँ चर्चा में हैं, जो आगामी वित्त वर्ष में लागू हो सकती हैं और विवादों के समाधान में तेजी ला सकती हैं। (Times of India के अनुसार)

 

भविष्य की संभावनाएँ, दिशा और सुधार: जीएसटी 2.0

जीएसटी के नौवें वर्ष में, वित्त मंत्रालय ने व्यापार करने में आसानी, अनुपालन को मजबूत करने और आर्थिक समावेशन को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही है। जीएसटी 2.0 के लिए कुछ संभावित सुधारों में शामिल हैं:

  1. प्रौद्योगिकी उन्नयन: जीएसटी पोर्टल को और अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने और रिफंड प्रक्रियाओं को स्वचालित करने की आवश्यकता।
  2. दरों का युक्तिकरण: कर दरों को और सरल बनाकर व्यवसायों और उपभोक्ताओं के लिए बोझ कम करना।
  3. क्षेत्रीय समानता: कम प्रदर्शन वाले क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना।
  4. अनुपालन को आसान बनाना: छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाना।
  5. लाभ की दरों का सरलीकरण, ट्रिब्यूनल की शुरूआत व तकनीकी क्षमता में सुधार अगले चरण हो सकते हैं।
  6. क्षेत्रीय नीतियों का असर: नागालैंड, सिक्किम जैसे राज्यों में वृद्धि धीमी रहने पर, इन्हें आर्थिक गतिविधियों के केंद्र में लाने की आवश्यकता है ।

 

विश्लेषण

  1. धीमा लेकिन स्थिर मासिक वृद्धि

जून में 6.2% की वार्षिक वृद्धि जून की रिकॉर्ड उच्चताओं (अप्रैल–मई) के बाद थोड़ी मायूस लगती है। सही मायने में देखा जाए, तो यह “विकसित स्थिति” का संकेत है — जब समय-समय पर सामान्यीकरण होता है।

  1. पांच वर्षों में दोहरी वृद्धि का महत्व

FY21 के ₹11.37 लाख करोड़ से FY25 में ₹22.08 लाख करोड़ तक का उछाल दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की औपचारिकता, कर अनुपालन तथा डिजिटलरण में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

  1. आर्थिक परिप्रेक्ष्य
  • Finance Ministry के अनुसार, 2017‑18 के ₹7.4 लाख करोड़ से FY25 के ₹22.08 लाख करोड़ का छलांग इस बात को दर्शाता है कि महा सुधार–भरा कर माहौल बना ।
  • Deloitte की रिपोर्ट से पता चलता है कि 85% उद्योग इस नए प्रणाली से संतुष्ट हैं ।

 

निष्कर्ष

जीएसटी ने अपने आठ वर्षों में भारत की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को बदल दिया है, इसने भारत के कर ढाँचे को मजबूत किया है। जीएसटी ने पिछले आठ वर्षों में एक विकसित और स्थिर कर व्यवस्था का निर्माण किया है। पांच वर्षों में दोहरी वृद्धि और करदाता आधार का विस्तार इसकी सफलता का प्रमाण हैं। FY25 में 22.08 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड संग्रह एक बड़ी उपलब्धि है, 8 वर्षों में संग्रह में हो रही दोहरी वृद्धि स्पष्ट संकेत है कि GST न सिर्फ राजस्व जुटाने में, बल्कि भारतीय व्यापार प्रणाली को संस्थागत बनाने में भी प्रभावी रहा है। 65 लाख से 1.51 करोड़ करदाता तक पहुंच, कर अनुपालन और आर्थिक औपचारिकता दोनों में वृद्धि को दर्शाता है। 1.51 करोड़ से अधिक करदाता, और डिजिटल प्रणाली में बढ़ता विश्वास इसकी सफलता को दर्शाता है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, FY25 में 9.4 % की वृद्धि और ₹22.08 लाख करोड़ का रिकॉर्ड संग्रह बहुत बड़े संकेत हैं। हालांकि, जून 2025 में धीमी वृद्धि और प्रणालीगत कमियाँ भविष्य में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं। जीएसटी 2.0 के साथ, भारत 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है, जिसमें जीएसटी एक प्रमुख सक्षमकर्ता के रूप में कार्य करेगा। यह कर सुधार न केवल राजस्व बढ़ाने में बल्कि भारत को एक एकीकृत, पारदर्शी और कुशल आर्थिक ढांचे में बदलने में महत्वपूर्ण रहा है। पूरी तस्वीर में बढ़ोतरी स्थिर और सकारात्मक बनी हुई है। भविष्य में डिजिटल तकनीक, कर सुधार और आर्थिक स्थिरता से जीएसटी संग्रहण को नई ऊँचाइयों पर ले जाया जा सकता है। इसने अभी भी सुधार की गुंजाइश है।

सरकार को चाहिए कि:

छोटे व्यवसायों को जीएसटी से जोड़े।

कर दरों को और सरल बनाए।

आर्थिक विकास को बढ़ावा देने वाले उपाय करे।

इस प्रकार, जीएसटी भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना रहेगा।

 

संक्षेप सारांश

जून 2025 मासिक संग्रह: ₹1.85 लाख करोड़ (+6.1–6.2 % YoY)

FY25 कुल संग्रह: ₹22.08 लाख करोड़ (+9.4 % YoY)

FY21–FY25 में दोगुना वृद्धि

मासिक औसत FY25: ₹1.84 लाख करोड़

करदाता दायरा: 65 लाख → 1.51 करोड़+

आठ साल की उपलब्धि: फिस्कल मजबूती, पारदर्शिता और प्रणालीगत सुधार

 

अंत में

GST ने पिछले आठ वर्षों में अपने आप को भारत का सबसे सफल कर सुधार साबित किया है। राजस्व जुटाने, कर अनुपालन और आर्थिक प्रणाली को डिजिटल रूप देने में यह एक मील का पत्थर है। आगामी वर्षों में slab rationalisation, ट्रिब्यूनल, और तकनीकी सुधारों से GST की क्षमता और बढ़ेगी।

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