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11 साल में भारतीय नागरिक विमानन क्षेत्र का विस्फोटक विकास

पिछले 11 वर्षों में भारत के नागरिक विमानन क्षेत्र ने अभूतपूर्व विस्तार और बदलाव देखा है। यह सिर्फ संरचनात्मक बदलाव नहीं रहे, बल्कि आर्थिक, तकनीकी और नियामकीय मोर्चों पर भी गहरा प्रभाव रहा है।

 

एयरपोर्ट का चौगुना विस्तार

2014 में देश में 74 हवाई अड्डे कार्यरत थे, जो मार्च 2025 तक बढ़कर 160 हो गए – इस अवधि में कुल 86 नए हवाई अड्डों का निर्माण या पथरोद्धार हुआ। यह विस्तार UDAN (Ude Desh ka Aam Nagrik) योजना की बदौलत संभव हो पाया, जिसे जून 2016 में शुरू किया गया और जिसके तहत अब तक 88 हवाईअड्डे जुड़ चुके हैं।

 

इस स्कीम के तहत काफी आर्थिक बचत हुई और आम नागरिकों को सस्ती उड़ान सेवाओं की सुविधा मिली – UDAN के तहत अब तक 1.51 करोड़ यात्रियों ने उड़ान की ।

 

यात्री संख्या में भारी उछाल

FY 2014–15 में जहाँ घरेलू एयर यात्री संख्या 82.2 मिलियन (8.22 करोड़) थी, वहीं FY 2024–25 में यह आंकड़ा दोगुना होकर 165 मिलियन (16.5 करोड़) तक पहुंचने का अनुमान है ।

इसके पीछे 2024 में एक दिन में 5 लाख से अधिक यात्री यात्रा करने की ऐतिहासिक घटना भी शामिल है, जो बताती है कि भारतीय विमानन क्षेत्र की क्षमता कितनी मजबूत हुई है ।

संचित आंकड़ों के अनुसार FY 2023–24 में कुल एयर यात्री संख्या 376 मिलियन थी, जिसमें से 306 मिलियन केवल घरेलू यात्री थे, जो दर्शाता है कि घरेलू फ्लाइट में कितनी वृद्धि हुई है।

 

फ्लीट और इंफ्रास्ट्रक्चर का आधुनिकीकरण

देश में कम लागत वाली एयरलाइंस (LCC) जैसे IndiGo, Air India Express और Akasa Air घरेलू सीटों का 71% हिस्सा संभाल रही हैं।

विमानों की संख्या 860 से बढ़कर 2025 तक और 739 ऑर्डर लंबित हैं। औसत विमान आयु घटकर 7.3 वर्ष रह गई है, जबकि विश्व औसत 14.8 वर्ष है।

 

कानून में सुधार और निवेश

Protection of Interest in Aircraft Objects Act, 2025: इस कानून से विमानों के लीज़ की लागत कम करने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने में मदद मिलेगी।

Bharatiya Vayuyan Adhiniyam, 2024: यह अधिनियम 1934 की पुरानी वायुमार्ग व्यवस्था को बदलकर ‘Make in India’ और ICAO मानकों के अनुकूल बनाया गया है।

 

तकनीक, सुरक्षा और हरा‑भरा अभियान

24 एयरपोर्ट पर DigiYatra एप लॉन्च कर संपर्क‑रहित यात्रा की शुरुआत हुई है; अब तक 80 लाख से अधिक यूजर और 4 करोड़+ यात्रा पूरी हो चुकी हैं।

DFDR और CVR लैब का निर्माण दिल्ली में सुरक्षा मानकों को मजबूत करेगा।

लगभग 80 एयरपोर्ट अब 100% हरित ऊर्जा से संचालित हैं। बंगलुरु, दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, चेन्नई जैसे बड़े हवाई अड्डों ने कार्बन न्यूट्रल स्तर हासिल किया है ।

 

मानव संसाधन और सीमांतिकरण

पायलटों की अनुपलब्धता को देखते हुए अगले 10–15 वर्षों में 30,000–34,000 पायलटों की आवश्यकता पड़ेगी, जिसके लिए FTOs (फ्लाइट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन) और लाइसेंस संख्या बढ़ाई जा रही है. इसके अलावा कॉलेजों में करियर गाइडेंस प्रोग्राम के माध्यम से छात्रों को विमानन कैरियर की जानकारी दी जा रही है।

 

चालू चुनौतियाँ

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार विमानन वृद्धि के सामने कई चुनौतियाँ हैं—उड़ान क्षमता की कमी, उच्च कर, MRO सुविधा की कमी और पाकिस्तान एयरस्पेस बंद होने के कारण ईंधन खर्च में वृद्धि। इसके चलते विशेषज्ञों के अनुसार नियामकीय ढांचे को और सुदृढ़ करना जरूरी है ।

 

अंत में—भारत आकाश में नए मुकाम पर

पिछले 11 वर्षों में भारतीय विमानन क्षेत्र ने

86 नए एयरपोर्ट बढ़ाए,

यात्री संख्या दोगुनी होकर लगभग 165 मिलियन तक पहुंची,

तकनीकी, नियामकीय व हरित पहलें कीं,

और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए आधार तैयार किया।

 

इसके साथ ही अभी तक की गति बेहद सकारात्मक रही है, लेकिन आने वाले वर्षों में क्षमता चौगुनी (airport count 160→400 तक), MRO लगान तथा नियामकीय सुधार इसी गति को दर्शाएंगे। यदि ये कार्य समय पर सम्पन्न हो जाते हैं, तो भारत FY 2047 तक दुनिया के अग्रणी विमानन बाजारों में से एक बन सकता है।

 

निष्कर्ष

भारत की नागरिक यात्रा व्यवस्था 2014 से 2025 के बीच एक बुनियादी बदलाव के दौर से गुज़र कर अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने को तैयार है। इस समयावधि में यात्री संख्या, विमान नेटवर्क, कानून, हरा‑भरा अभियान और मानव संसाधन के विकास ने मिलकर एक सुगठित, सुरक्षित व सुलभ विमानन परिवेश की नींव रखी है। आने वाले सालों में यही बदलाव देश को आधुनिक, आत्मनिर्भर और विकास के पथ पर अग्रसर बनाएंगे।

4 thoughts on “11 साल में भारतीय नागरिक विमानन क्षेत्र का विस्फोटक विकास

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