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सोने का भाव फिर पार कर गया 1 लाख रुपये का आंकड़ा

Gold price in india.

Gold price in india.

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सोने की कीमतों ने शनिवार को फिर से ऐतिहासिक उछाल दर्ज की। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना (गोल्ड) 1,00,320 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जबकि चांदी (सिल्वर) 1,25,450 रुपये प्रति किलो के उच्च स्तर पर कारोबार कर रही थी। यह उछाल इजरायल द्वारा ईरान के परमाणु सुविधाओं पर हमले के बाद देखने को मिली है, जिसने वैश्विक बाजारों में असुरक्षा की भावना बढ़ा दी है।

 

तनाव के बीच सोने में भागदौड़ के प्रमुख कारण

सुरक्षित निवेश की मांग:

भू-राजनीतिक तनाव के दौरान निवेशक सोने को ‘सुरक्षित हेवन’ मानते हैं।

डॉलर के मुकाबले रुपये में 0.8% की गिरावट ने सोने की कीमतों को और बढ़ावा दिया।

 

केंद्रीय बैंकों की खरीदारी:

RBI समेत वैश्विक केंद्रीय बैंकों ने पिछले 6 महीने में 15% अधिक सोना खरीदा है।

तेल की बढ़ती कीमतों का प्रभाव:

ब्रेंट क्रूड $98 प्रति बैरल के स्तर पर पहुंचा, जिससे महंगाई की आशंकाएं बढ़ीं।

 

भारतीय बाजार पर प्रभाव (MCX vs अंतरराष्ट्रीय बाजार)

पैरामीटर      भारत (MCX)     अंतरराष्ट्रीय (स्पॉट गोल्ड)

वर्तमान मूल्य  ₹1,00,320/10 ग्राम     $2,450/औंस

मासिक उछाल 12.5% 9.8%

वार्षिक वृद्धि   28%  22%

विशेषज्ञों की राय

“अगर तनाव और बढ़ता है तो सोना जून-जुलाई में ₹1,05,000 तक पहुंच सकता है। निवेशकों को 5-10% करेक्शन के बाद ही खरीदारी करनी चाहिए।”

“MCX पर सोने का ओपन इंटरेस्ट 18% बढ़ा है, जो बताता है कि बाजार में और तेजी आ सकती है।”

 

आम उपभोक्ताओं के लिए सलाह

ज्वैलरी खरीदार: फिलहाल छोटे सोने के सिक्के या लाइटवेट ज्वैलरी खरीदें।

निवेशक: SIP के तहत गोल्ड ETF में निवेश जारी रखें।

किसान: सरकार की ‘सोना बचाओ, किसान बचाओ’ योजना का लाभ उठाएं।

 

भविष्य का अनुमान

अल्पकालिक (1 महीना): ₹98,500-1,02,000/10 ग्राम रेंज

मध्यम अवधि (6 महीने): ₹1,10,000 तक की संभावना (अगर यूएस फेड रेट कट करे)

जोखिम कारक: ईरान-इजरायल युद्धविराम या अमेरिकी डॉलर में मजबूती से कीमतें गिर सकती हैं।

 

निष्कर्ष:

सोना अभी ‘बेचने की जल्दबाजी’ वाला बाजार नहीं दिख रहा। निवेशकों को तनाव के संकेतों पर नजर रखते हुए स्टॉप-लॉस का पालन करना चाहिए। वित्त मंत्रालय ने हालांकि आश्वासन दिया है कि आयात शुल्क में बदलाव की कोई योजना नहीं है, जो कीमतों को स्थिर रखने में मदद करेगा।

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